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Thursday, August 3, 2017

कुछ दिनों से ये तस्वीर ट्विटर, फ़ेसबुक वगरह कई जगह दिखाई जाई रही है. कई लोगों के अनुसार ये भारत की धर्म निरपेक्षता, सर्व धर्म सदभावना और भी पता नही क्या क्या की मिसाल है. पर कोई ये भी सोचेगा कि ऐसे मौके पर भी लोगों को सुरक्षा देने की ज़रूरत किस वजह से है ? अगर यह कश्मीरी मुसलमान (और भी कई जगह के) इतने ज़्यादा कट्टर और आतंकवादी ना होते तो ना कश्मीर में इतने सुरक्षा कर्मी होते ना ही किसी को ऐसे पहरे पर रहना पड़ता . कई सालों से देख रहा हूँ की धर्म निरपेक्षता और 1-2 ख़ास "अल्प-संख्यकों" की सुरक्षा का ठेका ज़बरदस्ती हिंदुओं के पल्ले ही ठूँसा जाया रहा है और हमारे लोग भी ऐसी बातों में गाँधी की औलाद बनने में सब से आगें हैं. अपनी आँखों के सामने इतना सब होते हुए देख कर भी कुछ लोग बिल्ली के सामने बंद आँखों वाले कबूतर बन के बैठे हैं कि कोई उन्हें संघी या संप्रदायिक ना बोल दे. विनाश काले विपरीत बुद्धि.


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