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Saturday, January 13, 2018

KAP ख़ास आदमी पार्टी

जिन बच्चो के भविष्य के लिए धन कमाते हो ,मकान बनाते हो, कभी सोचा आपने 30 साल बाद आपकी बचायी हुयी संपती लेने केलिए वे बच्चे नहीं रहेगे। आबादी बढ़ते ही मुस्लिम राष्ट्र हो जायेगा। ऐसा हो चूका है...और अभी भी जारी है >>>- एक दिन पूरे काबूल (अफगानिस्तान) का व्यापार सिक्खों का था, आज उस पर तालिबानों का कब्ज़ा है। सत्तर साल पहले पूरा सिंध सिंधियों का था, आज उनकी पूरी धन संपत्ति पर पाकिस्तानियों का कब्ज़ा है। एक दिन पूरा कश्मीर धन धान्य और एश्वर्य से पूर्ण पण्डितों का था, तुम्हारे उन महलों और झीलों पर आतंक का कब्ज़ा हो गया और तुम्हे मिला दिल्ली में दस बाय दस का टेंट। एक दिन वो था जब ढाका का हिंदू बंगाली पूरी दुनियाँ में जूट का सबसे बड़ा कारोबारी था | आज उसके पास सुतली बम भी नहीं बचा।- ननकाना साहब, लवकुश का लाहोर, दाहिर का सिंध, चाणक्य का तक्षशिला, ढाकेश्वरी माता का मंदिर देखते ही देखते सब पराये हो गए | पाँच नदियों से बने पंजाब में अब केवल दो ही नदियाँ बची | यह सब किसलिए हुआ ? केवल और केवल असंगठित होने के कारण ..| इस देश के मूल समाज की सारी समस्याओं की जड़ ही संगठन का अभाव है |- आज भी इतना आसन्न संकट देखकर भी बहुतेरा समाज गर्राया हुआ है | कोई व्यापारी असम के चाय के बागान अपना समझ रहा है, कोई आंध्र की खदानें अपनी मान रहा है | तो कोई सोच रहा है ये हीरे का व्यापार सदा सर्वदा उसी का रहेगा | कभी कश्मीर की केसर की क्यारियों के बारे में भी हिंदू यही सोचा करता था |- तू अपने घर भरता रहा और पूर्वांचल का लगभग पचहत्तर प्रतिशत जनजाति समाज विधर्मी हो गया | बहुत कमाया तूने बस्तर के जंगलों से...आज वहाँ घुस भी नहीं सकता | आज भी आधे से ज्यादा समाज को तो ये भी समझ नहीं कि उस पर संकट क्या आने वाला है | बचे हुए समाज में से बहुत सा अपने आप को सेकुलर मानता है | कुछ समाज लाल गुलामों का मानसिक गुलाम बनकर अपने ही समाज के खिलाफ कहीं बम बंदूकें, कहीं तलवार तो कहीं कलम लेकर विधर्मियों से ज्यादा हानि पहुंचाने में जुटा है | ऐसे में पाँच से लेकर दस प्रतिशत समाज ही बचता है जो अपने धर्म और राष्ट्र के प्रति संवेदनशील है | धूर्त सेकुलरों ने उसे असहिष्णु और साम्प्रदायिक करार दे दिया | इसलिए आजादी के बाद एक बार फिर हिंदू समाज दोराहे पर खड़ा है | एक रास्ता है, शुतुरमुर्ग की तरह आसन्न संकट को अनदेखा कर रेत में गर्दन गाड़ लेना तथा दूसरा तमाम संकटों को भांपकर सारे मतभेद भुलाकर संगठित हो संघर्ष कर अपनी धरती और संस्कृति बचाना |
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कामेश्वर

जस्टिस चमलेश्वर और CJI मिश्रा के बीच की प्रतिद्वंदता हर कोर्ट का जानकार रखता है। आज जो टशन बाहर आई उसका आधार वो 46 मेडिकल कॉलेज थे जिनको फर्जी तरीके से मान्यता दी गयी और इस माममें में सुप्रीम कोर्ट के कुछ जस्टिस की दखलंदाजी भी मानी जाती है। बाकायदा उड़ीसा के एक पूर्व जज को भी गिरफ्तार कर दिया गया था। अब इसके पीछे क्या खेल हो रहा है। वो समझें- दरअसल जस्टिस चमेलश्वर की हैसियत सुप्रीम कोर्ट में नम्बर 2 है जस्टिस मिश्रा के बाद। अब कॉलेजियम के अनुसार चीफ जस्टिस के नियंत्रण में कुल 5 जस्टिस अगला चीफ जस्टिस नियुक्त करते हैं, तो जस्टिस चमलेश्वर को अपना पत्ता कटता नजर आ रहा है। इसीलिए वो मीडिया में आकर लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं, और जस्टिस मिश्रा पर मनमानी का आरोप लगा रहे हैं। मगर बात इतनी भी नही है। जिस मेडिकल फर्जीवाड़े का केस जस्टिस मिश्रा ने पलटा, दरअसल उसके पीछे कई षड्यंत्र है। इस केस को प्रशांत भूषण देख रहा है। इस प्रशांत भीषण ने चुपचाप जस्टिस चमलेश्वर के पास जाके इस केस को अपने पसंदीदा जजों की बेंच पे भिजवा दिया। अब चूंकि ये मेंशनिंग का अधिकार सिर्फ चीफ जस्टिस का होता है तो मिश्रा ने इसे पलट दिया। इस पर भूषण चिल्लाता हुआ मिश्र के कोर्ट में जब पहुंचा तो वहां पहले से ही बार कौंसिल मौजूद थी। भूषण ने इतनी बदतमीजी की कि बार काँसिल के सचिव ने भूषण का लाइसेंस रद्द करने की मांग कर दी। इस पर जस्टिस मिश्र को कहना पड़ा कि यहां पहले तुम जैसे वकील ही केस के जज तय करते थे? इसलिए अब भी करना चाह रहे हो? हालांकि बात यहाँ भी खत्म नही होती। जस्टिस मिश्र ही वो हैं जिन्होंने याकूब मेनन पर अंतिम फैसला दे उसे फांसी लगवाई। तब ये भूषण, ग्रोवर, सिब्बल आदि कई NGO के साथ उसकी माफी मांग रहे थे। यहां तक कि कई जज भी। ये लोग तब देर रात को पहुंच गए थे और वहां अपनी बेजत्ती करवा आये। तब से जस्टिस मिश्रा इन्हें खटक रहे हैं। इसके अलावा अब राम मंदिर का केस भी फाइनल होने वाला है जो जस्टिस मिश्र के अधीन होगा, जिस पर इन लोगों का पूरा जोर है कि ये इस जस्टिस के रहते पूरा ना हो बल्कि इनके किसी चहेते के अधीन आये, ताकि ये उसे पहले तो अपने पक्ष, नहीं तो कम से कम अगले लोकसभा के बाद खींच पाएं। इस मामले में भी धवन और सिब्बल जस्टिस मिश्र को कोर्ट में ही धमकी दे आये थे और बेंच के जज की संख्या भी ज्यादा चाहते थे, जिसे जस्टिस मिश्रा ने मना कर दिया था। इसके अलावा जिन राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक है, वो केस भी मिश्रा की अदालत में चल रहा है जिस पर पूरी उम्मीद है कि वहां हिन्दू को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलेगा। इसके अलावा चिंदम्बरम का मैक्सिस केस भी जस्टिस के पास है जिसपर नियमित सुनवाई चलेगी। ट्रिपल तलाक़ पर मुह की खाये ये कांग्रेस पोषित गिरोह जानते है कि उपरोक्त केस में इनका क्या होगा और फिर आगे इनकी राजनीति का क्या होगा। जस्टिस लोया के नाम पर बहाना भी ये जस्टिस जो बना रहे है, उसका आधार भी अमित शाह को घेरना था, जिसमे कांग्रेसी मीडिया ने इनका साथ दिया और अब भी मीडिया पूरा इनके पक्ष में माहौल बनाएगी ताकि मिश्रा के आगे के जजमेंट को प्रभावित किया जा सके। ये कांग्रेस द्वारा पहली बार नही है। पिछले कितने जजों के उदाहरण है जिन्होंने कांग्रेस के भले के लिए काम किया और फिर मलाई खाई। उनपर लिखने में ये पहले से बड़ी पोस्ट पूरी किताब बन जाएगी। बाकी जब हम कहते है इस देश का हर मुद्दा मोदी बनाम कांग्रेस(और उसका गिरोह) है तो यूँही नही कहते। हम पीठ पीछे की बाते जानते हैं। हम तुम्हारी तरह सिर्फ आगबबूला होने वाले फेसबुकिये नही हैं। अगर यहां तक पूरा पढ़ा तो बहुत बहुत धन्यवाद। कुमार सुधांशु चौबे उदासी से साभार।
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Tuesday, January 9, 2018

The Nationalist View


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Sunday, January 7, 2018

This year's haul from International Book Fair, New Delhi.


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Tuesday, January 2, 2018

The Nationalist View


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